Hi guys

I'm sorry that I was unable to write anything because of over study loads. Now I am able to deal with the situation and will be back with some interesting topics. Thank you all my followers for your patience.

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सूरज कह उठा धरती से….

करता हूं मैं अपना काम, फिर भी तुम्हारे लिए मैं कम करूंग ा अपने पभाव। माना सूरज मानी बादल खुश हुई घरती, तभी हुई एक सूखी बारिश धरती माँ के नाम। नई उम्मीद के किरण को लेकर, नई रोशनी जग में फैलाकर, एक सूखे बारिश की बूंदों ने किया जग का कल्याण।

ताकत है मजबूरी नहीं  

यह आपकी मज़बूरी नहीं, है यह आपकी ताकत। झेल सकती है वह सब कुछ, नारी में है वो बात। मेरी प्या री बहनों, मेरी प्या री माओं, ​ याद दिला दूं  मैं आपको मजबूर नहीं है आप। जग के परम शक्ति को मेरा सादर प्रणाम। एक भाई का प्रणाम। एक बेटे के तरफ से प्रणाम। नारी … Continue reading ताकत है मजबूरी नहीं  

आखरी बारिश की बूंदें

कई दिनों से पानी ना बरसा सूखा पहा है संसार, आग फूक रहा है सूरज  धरती बडी उदास। धरती पूछे बादल से- "तुम क्यों हो मुझसे खफा? क्या हो गई है कोई गलती, जाने अनजाने मेरे यार। जी चाहता है बरसूं तुमपर सदा केलिए मेरे यार, लेकिन पानी है नही मुझमें मज़बूरी है मेरे यार। … Continue reading आखरी बारिश की बूंदें

Science is for the progress of humanity 

Science is for the progress of humanity 

Hi friends, I'm back with yet another post.     The wonders of science and technology are yet not unlocked completely. Scientists are inventing new things everyday. The list of contributions of science start from the brush and paste we use to the food we eat. The progress of science leads to the progress of humanity. … Continue reading Science is for the progress of humanity